Translate

सोमवार, 9 अगस्त 2021

शिवलिंग क्या हैं...? एवं शिवलिंग का महत्त्व

                        !! ॐ नम: शिवाय !!

 संस्कृत भाषा सभी भाषाओं की जननी है। और इसे देवों की वाणी भी कहा जाता हैं। लिंग का अर्थ संस्कृत में चिन्ह प्रतीक होता हैं ।जबकी जनर्नेद्रीय को संस्कृत में शिश्न कहा जाता हैं । शिवलिंग का अर्थ हुआ शिव का प्रतीक। जैसा कि पुरुष लिंग का अर्थ हुआ पुरुष का प्रतीक, स्त्रीलिंग का अर्थ हुआ स्त्री का प्रतीक ,और नपुंसक लिंग का अर्थ हुआ नपुंसक का प्रतीक। 


शिवलिंग क्या है़..? 

शून्य, आकाश, अनंत, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया हैं। स्कंद पुराण में कहा हैं। कि आकाश स्वयं लिंग हैं। शिवलिंग वातावरण सहित घूमती धरती तथा अनंत सारे ब्रह्माण्ड (क्योंकि, ब्रह्माण्ड गतिमान है) का अक्स/धुरी ही लिंग हैं। शिवलिंग का अर्थ अनंत होता हैं। अर्थात जिसका कोई अंत नहीं हैं और ना ही शुरुआत।

शिवलिंग का अर्थ लिंग या योनी नहीं होता। दरअसल यह गलत फहमी भाषा के रुपांतरण और मलेच्छों यवनों के द्वारा हमारे पुरातन धर्म ग्रंथो को नष्ट कर दिये जाने तथा बाद मे षडयंत्रकारी अंग्रेजो के द्वारा इसकी व्याख्या से उत्पन्न हुआ हैं।

 जैसा कि हम सभी लोग जानते है कि एक ही शब्दों के विभिन्न भाषाओं में अलग-अलग अर्थ निकलते हैं । उदाहरण के लिए यदि हम हिंदी के एक शब्द "सूत्र" को ही ले ले तो , सूत्र का मतलब डोरी/धागा गणितीय सूत्र कोई भाष्य अथवा लेखन भी हो सकता हैं । जैसे कि नासदीय सूत्र ब्रह्म सूत्र इत्यादि ।

 उसी प्रकार "अर्थ" शब्द का भावार्थ :  सम्पति भी हो सकता हैं , और मतलब (अर्थात्..मीनिंग) भी होता है। 

ठिक बिल्कुल उसी  प्रकार शिवलिंग के सन्दर्भ में लिंग शब्द से  अभिप्राय , चिन्ह, निशानी , गुण, व्यवहार या प्रतीक है़। धरती उसका पीठ या आधार हैं।और सब अनंत शून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा गया हैं। तथा कई अन्य नामों से भी संबोधित किया गया हैं । जैसे :- प्रकाश स्तंभ, अग्नि स्तंभ, उर्जा स्तंभ, ब्रह्माण्डीय स्तंभ ।

ब्रह्माण्ड में सभी चीजे है। ऊर्जा और पदार्थ से निर्मित हैं और आत्मा ऊर्जा हैं। इसी प्रकार शिव, पदार्थ और शक्ति ऊर्जा का प्रतीक बनकर शिवलिंग कहलाते हैं । ब्रह्माण्ड में उपस्थित ठोस तथा ऊर्जा शिवलिंग में निहित है़। वास्तव में शिवलिंग हमारे ब्रह्माण्ड की आकृति हैं। 

शिव लिंग भगवान शिव और देवी शक्ति का आदि-अनादी एकल रुप हैं तथा पुरुष और प्रकृति का समानता का प्रतिक भी हैं। अर्थात इस संसार मे न केवल प्रकृति (स्त्री) का वर्चस्व हैं अर्थात दोनो समान हैं ।

 सनातन धर्म के ग्रन्थों में  त्यौहार, विज्ञान की आधार शिला देखने को मिलती है़। जो कि हमारे पुर्वजों, संतो, ऋषियों, मुनियों तपस्वियों की देन हैं। आज के समय मे विज्ञान भी हमारे हिंदू संस्कृती एवं ग्रंथों पर रिसर्च कर रहा हैं।

 योनी का संस्कृत में अर्थ प्रादुभार्व ,प्रकटीकरण होता हैं। जबकी हिंदू धर्म में 84 लाख योनी बताई जाती हैं। यानी 84 लाख प्रकार के जन्म हैं।अब तो वैज्ञानिको ने भी मान लिया हैं कि धरती में 84 लाख प्रकार के जीव (पेड़,कीट,जानवर,मनुष्य आदि) हैं।

 अब बात करते है मनुष्य योनी की 

पुरुष और स्त्री दोनों को मिलाकर मनुष्य योनी होता हैं। अकेले स्त्री या अकेले पुरुष के लिए मनुष्य योनी शब्द का प्रयोग संस्कृत में नहीं होता हैं।

 अर्थात् लिंग का तात्पर्य प्रतिक से हैं शिवलिंग का मतलब हैं पवित्रता का प्रतीक ।


दीपक की प्रतिमा बनाये जाने से इसकी शुरुआत हुई , बहुत से हठ योगी दीपशिखा पर ध्यान लगाते हैं । हवा में दीपक कि ज्योति टिमटिमा जाती हैं।और स्थिर ध्यान लगाने की प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न करती हैं। इसलिए दीपक की प्रतिमा स्वरुप शिवलिंग का निर्माण किया गया।


मंगलवार, 16 मार्च 2021

भगवान और भक्त के बीच का अदम्य प्रेम

 मां भक्त शिरोमणि कर्मा बाई जयंती 2021 



मां भक्त शिरोमणि कर्मा बाई जी का जन्म उत्तर प्रदेश के झांसी में साहू ( तेली ) परिवार में हुआ था इनके माता पिता तेल व्यवसाई एवं धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे बचपन से ही कर्मा बाई श्री कृष्ण की अनंत भक्त थी भक्त शिरोमणि कर्मा बाई की जब विवाह योग्य हुई


तो इनका विवाह नरवर गढ़ में साधारण साहू परिवार में हुआ विवाह होने के बाद भी भक्त शिरोमणि कर्मा बाई जी श्री कृष्ण की भक्ति में हमेशा डूबी रहती थी उनकी श्री कृष्ण भक्ति को देखकर वहां सभी ओर उनकी ख्याति फैलने लगी


नरवर गढ़ का राजा क्रूर स्वभाव का था एक बार नरवर गढ़ के राजा के हाथी को खुजली हो गई मां भक्त शिरोमणि कर्मा बाई जी की श्री कृष्णा उपासना को देखकर वहां के स्थानीय


राजपुरोहित एव ब्राह्मण उन से ईर्ष्या करते थे जिसके कारण उन्होंने तेली समुदाय को अपमानित करने के लिए कुटिल चाल चली और राजा को सुझाव दिया कि यदि तेली समुदाय तेल से तालाब को भर दे और उसमें आपका हाथी स्नान कर ले तो हाथी कि खुजली दूर हो सकती है राजा ने आदेश दिया कि सभी तेली समुदाय तेल से तालाब भर दे वरना उन्हें देश निकाला कर दिया जाएगा और कड़ी सजा दी जाएगी इस आदेश को सुनकर स्थानीय तेली समुदाय में हाहाकार मच गया।


उनकी लाख कोशिश करने के बाद भी तेल से तालाब नहीं भर पाया तब सभी लोग व्याकुल हो गए और अपनी समस्या को लेकर


मां भक्त शिरोमणि कर्मा बाई जी के पास गए और उन्हें समस्या से अवगत कराया समाज के लोगों की विपत्ति को सुनकर मां भक्त शिरोमणि कर्मा बाई जी ने


भगवान श्री कृष्ण जी की स्तुति की और उनसे प्रार्थना की कि हमारे परिवार एवं समाज पर दया करें इस प्रार्थना के उपरांत यकायक भगवान श्री कृष्ण की कृपा से रातों-रात


तेल से पूरा तालाब भर गया राजपुरोहित एवं पंडित तेली समुदाय को अपमानित करने के लिए इंतजार कर रहे थे लेकिन सुबह होते ही माता ने राजा के पास अपने लोगों को संदेश देकर भिजवाया और कहा कि राजा अपने खुजली वाले हाथी को तालाब में नहला सकते हैं उनके संदेश से सभी लोग आश्चर्यचकित हो गए।


राजा ने अपने हाथी को तालाब में स्नान कराया एवं रात भर में भरे तेल से तालाब के इस चमत्कार की सूचना पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल गई अंत में राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह मां कर्मा बाई जी से क्षमा मांगने लगे लेकिन कर्मा बाई जी को राजपुरोहित और पंडितों के इस प्रकार के कृत्य से तेली समुदाय का अपमान बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने नरवर गढ़ राज्य को त्यागने का निर्णय लिया भक्त शिरोमणि कर्मा बाई जी के साथ उनके सभी परिवार एवं क्षेत्र के तेली समुदाय साथ हो लिया।


विभिन्न जगह घूमते घूमते वह अपने आराध्य श्री कृष्ण के पावन धाम जगन्नाथ पुरी पहुंच गई वहां उन्होंने भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने की इच्छा व्यक्त की जैसे ही माता मंदिर में पहुंची वहां के पंडितों एवं पुरोहितों द्वारा माता का तेली नीच जाति का कहकर अपमान किया जिससे माता को गहरा दुख हुआ और वह समुद्र किनारे पहुंचकर खिचड़ी का भोग लगाकर भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति करने लगे और साक्षात भगवान माता की गोद में आकर विराजमान हो गए


उधर जगन्नाथ पुरी मंदिर से श्री कृष्ण भगवान की प्रतिमा गायब होने के कारण हाहाकार मच गया वहां के राजपुरोहित एवं पंडितों को अपनी गलती का एहसास हुआ और भागते हुए समुद्र किनारे माता के पास पहुंचे और देखते ही दंग रह गए कि साक्षात भगवान उनके हाथों से खिचड़ी का भोग ग्रहण कर रहे हैं माता की इस महिमा को देखकर जगन्नाथ पुरी के राजा एवं राजपुरोहित द्वारा घोषणा की कि अब हमेशा जगन्नाथपुरी में मां भक्त शिरोमणि कर्मा बाई जी की खिचड़ी का प्रसाद ही लगाया जाएगा।


तभी से पूरे संसार में एक बात प्रचलित हो गई जगन्नाथ का भात जगत पसारे हाथ ऐसी थी मां शिरोमणि कर्मा भाई जी की महिमा बोलिए भक्त शिरोमणि मा कर्मा बाई जी की जय।


आप सभी साहू ( तेली ) बंधुओं से निवेदन है कि आगामी  7 अप्रैल को माँ कर्मा बाई जयंती पर देश भर में बड़ी धूमधाम से मनाएं जयंती,

बुधवार, 13 जनवरी 2021

मकर संक्रांति का महत्व एवं सूर्य देव की उपासना

 

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियां मानी गई हैं। उनमें एक मकर राशि में सूर्य के प्रवेश करने को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। महात्तम यह है कि सूर्य के उत्तरायण होने को मकर संक्रांति कहते हैं। इसे हिंदुओं का बड़ा त्यौहार भी माना जाता है। यह पर्व शीत ऋतु के जाने तथा मनोहरी बसंत के आगमन का प्रतीक है। इसे भगवान सूर्य देव की उपासना और स्नान ध्यान का पर्व भी मनाते हैं। इसे पूरे देश में बड़ी श्रद्धा उमंग और उत्साह के साथ मनाया जाता है।


पौराणिक कथाओं के अनुसार यशोदा माता ने इस दिन श्रीकृष्ण के जन्म के लिए व्रत रखा था। उसी दिन मकर संक्रांति के व्रत की परिपाटी चली आ रही है। पुराणों में वर्णित है कि सूर्य के मकर राशि में होने से मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति की आत्मा मोक्ष को प्राप्त करती है अर्थात आत्मा को जन्म मरण के बंधनों से मुक्ति मिल जाती है। महाभारत काल में अर्जुन के बाणों से घायल भीष्म पितामह ने गंगा के तट पर सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को 26 दिनों का इंतजार किया था। इच्छा मृत्यु का वरदान मिलने के कारण वह मोक्ष की प्राप्ति के लिए सूर्य के उत्तरायण होने तक जीवित रहे। श्री पदम पुराण में कहा गया है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान अक्षय पुण्य देने वाला है और पाप नाशक है 


इसलिए तिल गुड़ के व्यंजन ऊनी वस्त्र कंबल काले तिल आदि दान करने की परंपरा है। मकर संक्रांति के हर 12 वर्ष प्रयाग उज्जैन हरिद्वार और नासिक कुंभ में मेला लगता है। जहां समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत की कुछ बूंदें गिरी थी। इस पर्व पर दक्षिण भारत में बालकों विद्याधन प्रारंभ कराया था। प्राचीन रूप में इस खजूर अजीत तथा शहद बांटने की प्रथा का उल्लेख मिलता है। मकर संक्राति का पर्व पंजाब में लोहड़ी दक्षिण में पूगल मध्य प्रदेश व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संक्रात पूर्वी उत्तर प्रदेश बिहार में खड़ी के नाम से जाना जाता है।

इस त्यौहार को लोग बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं मकर संक्रांति के दिन लोगों द्वारा आसमान की ऊंचाइयों में कागज की पतंग उड़ा कर इस त्योहार को यादगार बनाते हैं

मंगलवार, 29 दिसंबर 2020

बरुआसागर नगर का पुस्तकालय जहां से सैकड़ों छात्रों ने सफलता अर्जित की है

 

बरुआसागर में स्थित नगर पालिका द्वारा संचालित पुस्तकालय जो नगर के युवाओं के लिए एक ज्ञान अर्जित करने के लिए मुख्य केंद्र है इस पुस्तकालय से लाभ उठाकर डेढ़ सैकड़ा से अधिक छात्रों ने सरकारी एवं गैर सरकारीयों परीक्षाओं में सफलता हासिल करके अपना कैरियर बनाया है नगर के युवाओं की विशेष मांग पर नगर के संभ्रांत नागरिक पूर्व मुख्य सचिव पश्चिम बंगाल प्रमोद कुमार अग्रवाल आई ए एस के प्रयासों से नगर में पुस्तकालय का निर्माण कराया गया था जो नगर पालिका द्वारा संचालित हो रहा है इस पुस्तकालय में लगभग सभी कंपटीशन समाचार पत्र पत्रिकाएं ज्ञानवर्धक पुस्तकें कैरियर से संबंधित रोजगार पत्र निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं जिसका लाभ नगर के अनेक छात्र युवा एवं बुजुर्ग विभिन्न क्षेत्रों का ज्ञान अर्जित कर के उठा रहे हैं इस लाइब्रेरी में उच्च स्तर के साहित्य फर्नीचर बैठने की उत्तम व्यवस्था स्वच्छ वातावरण होने के कारण पढ़ने वाले छात्र छात्राएं ऑटोमेटिक खींचे चले आते हैं  वर्तमान में नवीन युवा पीढ़ी एवं संचार क्रांति से बदले माहौल एवं सरकारी बा गैर सरकारी संस्थाओं में नौकरियों की कमी के कारण छात्रों का रुझान पढ़ाई से हटा है जिस कारण लोग लाइब्रेरी में ना आकर घरों में ही कंप्यूटर एवं मोबाइल से अपनी तैयारी कर रहे हैं यहां निशुल्क पुस्तकें एवं सलाह मिलने के बाद भी छात्रों एवं युवाओं का रुझान विभिन्न कोचिंग संस्थानों एवं ऑनलाइन कोचिंग एडवाइजर की ओर जा रहा है जिसका मुख्य कारण इस पुस्तकालय का प्रचार प्रसार सही रूप से ना होना एवं पेशेवर लाइब्रेरियन की नियुक्ति ना होने के कारण प्रमुख है छात्रों युवाओं एवं जागरूक लोगों से अनुरोध है कि इस पुस्तकालय का अधिक से अधिक लाभ उठाएं क्योंकि इस पुस्तकालय पर नगर का बजट खर्च किया जाता है लेकिन लाभार्थी ना होने के कारण यह पुस्तकालय सफेद हाथी बना हुआ है इसलिए लोग अधिक से अधिक संख्या में पुस्तकालय में पहुंचकर ज्ञान का सदुपयोग करें एवं नगर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान निभाए

सोमवार, 21 दिसंबर 2020

विश्व प्रसिद्ध शक्ति पीठ तारा देवी मंदिर

 

झांसी मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर बरुआसागर के पास स्थित मध्य प्रदेश में निवाड़ी के सिनोनिया गांव में  स्थित विश्व की प्रमुख शक्तिपीठ तारा देवी का मंदिर विशाल पर्वत के ऊपर स्थित है मां तारा देवी तंत्र मंत्र यंत्र की प्रमुख देवी मानी जाती हैं


देश में तारा देवी जी की शक्ति पीठ देश के कुछ स्थानोंं पर स्थित हैं तारा देवी मंदिर की ऊंचाई से ओरछा के रामराजा मंदिर एवं बेतवा नदी और वहांं के विशाल सागौन के जंगल स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं तारा देवी मंदिर के बारे में अनेक कहानियांं प्रचलित हैं उसमेंं से पूर्व समय मे सिनोनिया एवं भेलसा गावोंं के मध्य तारा माता का विशाल पर्वत मंदिर  स्थित होने के कारण  दोनों ही गांव मे माता की अधिक सेवा एवं अधिकार को लेकर काफी वाद विवाद हुआ सिनोनिया गांंव अघिक सम्पन्न होने के कारण माता को खीर का भोग लगाने की प्राथना करने लगे वही दूसरी ओर भेलसा गांंव के लोग गरीब होने के कारण माता से मठ्ठामहरी के भोग कराने की याचना करने लगेंं यकायक माता का चमत्कार हुआ और माता का मन्दिर विशाल पर्वत को चीरकर गरीब भेलसा गांव की ओर कट गया पर्वत के कटे हुए भाग से आज भी शेर के दहाड़ने की आबाज आती हैं


तारा माता के मन्दिर पर हर वर्ष गुरू पूर्णिमा के अवसर पर विशाल मेला एवं भंडारे का आयोजन किया जाता हैं तारादेवी माता मंदिर पर दूर दूर से भक्त मनोकामना की पूर्ति एवं माता के दर पर माथा ठेकने के लिए आते है

गुरुवार, 3 दिसंबर 2020

बरुआसागर का ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन एवं यहां की प्रमुख समस्याएं

 


बरुआसागर नगर के लिए एक मोती की तरह स्थापित बरुआसागर नगर का प्राचीन रेलवे स्टेशन जो कि नगर को पूरे देश भर से जोड़ता है

 बात उस समय की है कि जब यातायात के साधन कम हुआ करते थे कम साधन होने के साथ-साथ झांसी जिले से बरुआसागर आने के लिए विशाल एवं प्राचीनतम बेतवा नदी को पार करना पड़ता था जिसके लिए प्रमुख रूप से पानी में चलने वाली नाव पर ही पूरी तरीके से लोगो को आश्रित होना पड़ता था क्योंकि पूरे देश के मध्य में पढ़ने वाला झांसी एवं उस समय यह मार्ग देश के प्रमुख नगर रहे इलाहाबाद को जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण था  इसलिए अंग्रेजी शासन काल में बेतवा पर एक रेलवे पुल का निर्माण  कराने की जरूरत समझी गई  जिससे अंग्रेज कालीन कंपनी को सैन्य एवं माल भाड़े में सुविधा होकर देश के महत्वपूर्ण भाग पर अपना प्रभुत्व जमा सकें इसीलिए अंग्रेजों ने बेतवा नदी पर महत्वपूर्ण रेलवे पुल बनाकर रेल मार्ग से झांसी को इलाहाबाद से जोड़ने का महत्वपूर्ण एवं दूरगामी दृष्टि कार्य किया जिससे बरुआसागर नगर को रेल यातायात का महत्वपूर्ण साधन प्राप्त हुआ पूर्व में बरुआसागर में विभिन्न प्रकार की माल गाड़ियों से सामान उतारा जाता था एवं यहां पर व्यापारियों द्वारा बड़े स्तर से रेलगाड़ी के माध्यम से व्यापार होता था इस रेलमार्ग से देश के प्रमुख देश आजाद कराने वाले नेताओं द्वारा यात्रा की एवं बरुआसागर स्टेशन पर  रुक रुक कर लोगों को संबोधित भी किया जिसमें देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी प्रमुख रहे आजादी के बाद झांसी की स्थानीय सांसद डॉक्टर सुशीला नैयर द्वारा विशेष प्रयास से  बेतवा नदी पर सड़क यातायात पुल बनने के बाद नील यातायात से व्यापार बहुत हद तक कम हो चुका है वर्तमान बरुआसागर रेलवे स्टेशन का विकास आजादी के बाद जिस तरीके से होना चाहिए था वह शायद नहीं हो पाया क्योंकि बाद में इलाहाबाद को जोड़ने के लिए कानपुर एवं मानकपुर से देश के अन्य भागों जोड़ा गया जिस कारण इस मार्ग का महत्त्व थोड़ा कम हुआ यातायात के लिए प्रमुख गाड़ियां पूर्व में रुकती थी वह धीरे-धीरे कम हो गई वर्तमान में बुंदेलखंड एक्सप्रेस चंबल एक्सप्रेस जैसी प्रमुख देश की रेलगाड़ियां बरुआसागर स्टेशन पर रूकती हैं वर्तमान में झांसी मानिकपुर रेल मार्ग का विद्युतीकरण पूर्ण हो चुका है एवं भविष्य में रेल मार्ग का दोहरीकरण की प्रक्रिया फाइलों में चल रही है एवं बरुआसागर नगर में रेलवे स्टेशन की नवीन  बिल्डिंग का भी निर्माण हुआ है   बुंदेलखंड का यात्री झांसी बांदा  रेल मार्ग पर ज्यादातर झांसी से चलने वाली पैसेंजर ट्रेनों पर पूरी तरीके से निर्भर था वर्तमान समय में जब कोरोना महामारी  काल चल रहा है उस समय  जब रेल प्रशासन द्वारा इस रेल मार्ग पर चलने वाली लगभग सभी पैसेंजर गाड़ियां  बंद कर दी गई है एवं  प्रमुख गाड़ियों की टिकट प्रक्रिया चेंज करने के कारण लोग पूरी के तरीके से सड़क यातायात पर लोग निर्भर हैं लेकिन वर्तमान समय में झांसी से इलाहाबाद को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे  79 को विस्तार दिया जा रहा है जिससे इस मार्ग पर सड़क में अनेक गड्ढे एवं यातायात के लिए पूरी तरीके से खतरनाक हो गया है बुंदेलखंड का बड़ा भूभाग इसी रेल मार्ग एवं यातायात मार्ग से झांसी से देश के विभिन्न महानगरों को रोजगार एवं व्यापार के लिए जाता था नेशनल हाईवे  पूर्ण होने में अभी काफी समय है एवं वर्तमान सड़क की हालत बेहद ही जर्जर है कोरोना गाइडलाइंस के कारण कोरोना महामारी काल में अनेक यातायात के साधन लगभग बंद हो गए हैं सोशल डिस्टेंस से लेकर अनेक सरकारी गाइडलाइन के कारण यहां के गरीब एवं पिछड़े यात्रियों को बेहद आर्थिक एवं सामाजिक समस्याओं का सामना उठाना पड़ रहा है प्राइवेट वाहनों द्वारा लोगों के साथ मनमर्जी किराए के नाम पर  लूट  की जा रही है


वर्तमान में सरकार को संज्ञान लेने की जरूरत है इस लाइन पर अधिक सेेेेेे अधिक यात्री गाड़ियां  चलाई जाएं  एवं जब तक नेशनल हाईवे 79 कंप्लीट नहीं हो जाता तब तक रेलवे के विशेष पैसेंजर एवं मेमो   डीएमयू जैसी ट्रेनें चलाकर बुंदेलखंड के अति पिछड़े क्षेत्र के लोगों को राहत प्रदान करने की जरूरत है इस रूट पर कम ट्रेनें होने के कारण ट्रैफिक का भी ज्यादा लोड नहीं है स्थानीय लोगों की मांग है कि झांसी मानिकपुर रेल मार्ग पर अधिक से अधिक ट्रेनों को बढ़ाकर इस क्षेत्र के लोगों को राहत प्रदान करें



बुधवार, 25 नवंबर 2020

बरुआसागर का 🔱मुकुट कैलाश पर्वत की यात्रा


👼बचपन की यादें 

 


परिचय

आज मे बात कर रहा हू बुन्देलखण्ड के झांसी जिले के एतिहासिक आधयात्मिक व्यापारिक नगर बरुआ सागर के पूरब मे खडे पर्वत कैलाश की जो नगर को हमेशा साच्छात हिमालय के कैलाश पर्वत एवं उसी के समीप स्थित बरुआसागर झील मानसरोवर झील की अनुभूति कराती रहती हैं                                                               

मेरी पहली कैलाश पर्वत यात्रा यादे

बरुआ सागर नगर पर्वत की तलहटी में बसा होने के कारण दूर दूर से लगभग सभी घरों की छतों एवं मैदानो से पर्वत स्पष्ट दिखाई देता था और जब सुबह सुबह सूरज कैलाश से उदय होकर फैलाने वाली प्राकृतिक सुन्दरता  हमेशा मन मे वहां पर पहुंच कर सब कुछ देखने की उत्सुखता हमेशा रहती थीं कि आखिर पर्वत के पीछे ऐसा क्या है जिससे यह सूरज निकलता  हैं 

आखिर मेरी उत्सुखता खत्म होने का समय आ गया वह था महाशिवरात्रि महापर्व जिस दिन कैलाश पर्वत पर निवास करने वाले महात्मा जी के नेत्रत्व मे  जन सहयोग से पूरे नगर मे शिव बारात निकाली जाती थीं जब शिव बारात मेरे घर से निकली उसमे मेरे साथ स्कूल मे पढने वाले कुछ बच्चे दिखाई दिये फिर क्या था हो लिया उनके साथ बारात समापन के समय सब लोगों की तरह पहली सीडी को छूकर सर पर लगाते हुए चढ गया उत्साहित होकर एक ओर डर था कि घर पर बिना बताये आया था पता चलने पिटाई पक्की थी पुछने पर कोई आने नही देता 

जो होगा देखा जायेगा सोचकर चढ गया चोटी पर वहां का नजारा देख कर मन जोश एवं उत्साह से भर गया सबसे पहले मन हमेशा उठने वाले सबालो को शांत करने के लिये कैलाश पर्वत के पीछे के जेसे ही देखा देखते ही रह गया नीले पानी की विशाल झील उसी के साथ लगा


ऐतिहासिक किला एवं हरे भरे पेड़ पौधे व हरियाली झील के बीच टापू व दूसरी तरफ नगर के रंग विरंगे ऊचाई के कारण छोटे छोटे दिख रहे घर व लोग अलग ही दुनिया की अनुभूति करा रहे थे सच में वह जीवन का सुखद अनुभव हमेशा याद आता हैं


हम लोग बहुत ही भागयशाली है कि हमारा जन्म इस पावन धरा पर हुआ


जहा प्रकृति ने दिल खोलकर नदी तालाब पर्वत किला झील झरना नहरें जंगल बाग बागवानी के साथ शान्त एवं स्वस्थ जीवन जीने का आर्शीवाद व वरदान दिया

सोने चांदी के उतार चढ़ाव के राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मूल कारण

सोना-चांदी : अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव सोना-चांदी : अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव, भारतीय बाजार और वैश्विक उद्योग पर प्रभा...